Saturday, January 24, 2009

GYARAH VACHAN


जो शिर्डी में आएगा, आपद दूर भगायेगा ।

चढ़े समाधी की सीधी पर , पाँव तलें दुःख की पीढी पर ।

त्याग शरीर चला जाऊंगा , भक्त हेतु दौड़ा आऊँगा ।

मन में रखना दृढ़ विश्वास, करे समाधि पूरी आस ।

मुझे सदा जीवित ही जानो, अनुभव करो सत्य पहचानो ।

मेरी शरण आ खाली जाए , हो तो कोई मुझे बतलाये ।

जैसा भाव रहा जिस जन का , वैसा रूप हुआ मेरे मन का ।

भार तुम्हारा मुझ पर होगा, वचन न मेरा झूठा होगा ।

आ सहायता लो भरपूर , जो माँगा वोह नहीं है दूर ।

मुझ में लीन वचन मन काया , उसका ऋण न कभी चुकाया ।

धन्य धन्य वह भक्त अनन्य , मेरी शरण तज जिसे न अन्य ॥


॥ जय साईं राम ॥

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