Saturday, January 24, 2009
GYARAH VACHAN
जो शिर्डी में आएगा, आपद दूर भगायेगा ।
चढ़े समाधी की सीधी पर , पाँव तलें दुःख की पीढी पर ।
त्याग शरीर चला जाऊंगा , भक्त हेतु दौड़ा आऊँगा ।
मन में रखना दृढ़ विश्वास, करे समाधि पूरी आस ।
मुझे सदा जीवित ही जानो, अनुभव करो सत्य पहचानो ।
मेरी शरण आ खाली जाए , हो तो कोई मुझे बतलाये ।
जैसा भाव रहा जिस जन का , वैसा रूप हुआ मेरे मन का ।
भार तुम्हारा मुझ पर होगा, वचन न मेरा झूठा होगा ।
आ सहायता लो भरपूर , जो माँगा वोह नहीं है दूर ।
मुझ में लीन वचन मन काया , उसका ऋण न कभी चुकाया ।
धन्य धन्य वह भक्त अनन्य , मेरी शरण तज जिसे न अन्य ॥
॥ जय साईं राम ॥
Monday, January 12, 2009
ANIL AWASTHI ( ROHTAK)
मेरी अनिल से मुलाकात दिल्ली के साईं मन्दिर में २६ अगस्ट १९९६ को हुई। बाबा के यह भक्त गवर्नमेंट के किसी ऑफिस में काम करते थे और जल्द ही retire होने वाले । पर अपने बेटे और बहू की बातों बहुत दुखी रहते थे और शायद येही वजह थी की उन्हें जब भी समय मिलता था वोह बाबा के मन्दिर आ जाते थे। बस उनकी एक ही तमन्ना थिस की घर के सभी लोग प्यार से एक साथ रहें ताकि वो अपनी बची ज़िन्दगी प्यार से अपने ही घर में गुजार दे।
और बाबा ने उनकी खूब सुनी , उनकी भक्ति और बाब के आशीर्वाद से आज भी उनके बेटे उनकी हर बात मानते हैं और वो सब भी बाबा के चमत्कार से सुख समृधि प्राप्त कर रहे हैं , और अनिल जी अभी भी कहीं न कहीं किसी न किसी साईं संध्या में मिल ही जाते हैं और हमेशा बाबा की जय जय कार करते रहते हैं ।
जय श्री साईं ।।
और बाबा ने उनकी खूब सुनी , उनकी भक्ति और बाब के आशीर्वाद से आज भी उनके बेटे उनकी हर बात मानते हैं और वो सब भी बाबा के चमत्कार से सुख समृधि प्राप्त कर रहे हैं , और अनिल जी अभी भी कहीं न कहीं किसी न किसी साईं संध्या में मिल ही जाते हैं और हमेशा बाबा की जय जय कार करते रहते हैं ।
जय श्री साईं ।।
Saturday, January 3, 2009
OM SHRI SAI NATHAY NAMAH
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